आजमगढ़इतवाउत्तर प्रदेशकुशीनगरगोंडागोरखपुरजौनपुरप्रताप गढ़बस्तीबहराइचलखनऊसिद्धार्थनगर 

बस्ती का ‘कसाईखाना’? सूर्या हॉस्पिटल: जहाँ इलाज नहीं, मौत और मजबूरी बिकती है!

"जहर खा लेना, पर यहाँ मत जाना!"— सोशल मीडिया पर सूर्या हॉस्पिटल के खिलाफ फूटा जनता का ज्वालामुखी।

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: ‘इलाज’ या ‘मौत का सौदा’? सूर्या हॉस्पिटल के खिलाफ फूटा जनता का आक्रोश!

बस्ती मंडल | ब्यूरो रिपोर्ट | 16 अप्रैल, 2026

  • सफेद कोट के पीछे छिपा ‘नरभक्षी’ चेहरा? सूर्या हॉस्पिटल की काली करतूतों का पर्दाफाश!
  • मसीहा या महाठग? सूर्या हॉस्पिटल में मरीजों को ‘सोने का अंडा’ देने वाली मुर्गी समझने का खेल।
  • बस्ती का सूर्या हॉस्पिटल: जहाँ मासूमों की हड्डी और उम्मीदें दोनों तोड़ी जाती हैं।
  • विरासत में मिली लापरवाही: पिता के बाद अब पुत्र पर भी ‘इलाज के नाम पर लूट’ के गंभीर आरोप।
  • बस्ती प्रशासन मौन क्यों? उपभोक्ता फोरम के मुकदमों के बाद भी सूर्या हॉस्पिटल पर कार्रवाई कब?
  • इलाज के नाम पर ‘अंग-भंग’ का धंधा: क्या बस्ती के स्वास्थ्य विभाग ने बेच दी है अपनी आँखें?
  • सावधान बस्ती! जिला अस्पताल के बगल में चल रहा है शोषण का सबसे बड़ा अड्डा— ‘सूर्या हॉस्पिटल’।

उत्तर प्रदेश। बस्ती जिले में स्वास्थ्य सेवा के नाम पर क्या “सफेदपोश डकैती” चल रही है? यह सवाल आज हर उस शख्स की जुबां पर है जिसने सोशल मीडिया पर वायरल उस दर्दनाक अपील को सुना है, जिसमें एक पीड़ित यहाँ तक कह गया— “जहर खा लेना, पर सूर्या हॉस्पिटल मत जाना।”

मसीहा नहीं, ‘जल्लाद’ का चेहरा?

कहते हैं डॉक्टर धरती पर भगवान का रूप होते हैं, लेकिन बस्ती के सूर्या हॉस्पिटल को लेकर जो आरोप लग रहे हैं, वो रूह कंपा देने वाले हैं। वायरल वीडियो में पीड़ित का आरोप है कि यहाँ के डॉक्टर ‘भगवान’ नहीं, बल्कि ‘राक्षस’ और ‘महाठग’ की भूमिका निभा रहे हैं।

  • जेनेरिक को पेटेंट बताकर लूट: आरोप है कि अस्पताल में सस्ती जेनेरिक दवाओं को ऊंचे दामों पर मरीजों को थमाया जाता है।
  • मरीज नहीं, ‘सोने का अंडा’ देने वाली मुर्गी: यहाँ आने वाले मरीजों को इंसान नहीं, बल्कि कमाई का जरिया समझा जाता है। जब तक तीमारदारों की जेब खाली न हो जाए, तब तक अस्पताल उन्हें “डिस्चार्ज” की राहत नहीं देता।

ऑपरेशन या शरीर के साथ खिलवाड़?

अस्पताल की लापरवाही के किस्से किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं हैं। लेख में किए गए दावों के मुताबिक:

  • हड्डी का गलत ऑपरेशन: मरीज की टूटी हड्डी जोड़ने की बजाय, उसे और खराब कर दिया गया, जिससे व्यक्ति चलने लायक भी नहीं बचा।
  • लापरवाही की हद: ऑपरेशन के दौरान कैंची और रूई शरीर के अंदर ही छोड़ देना यहाँ आम बात बताई जा रही है।
  • मछली बाजार जैसा व्यवहार: मरीजों को इंसानी गरिमा के साथ नहीं, बल्कि बाजार की वस्तु की तरह ट्रीट किया जाता है।

1. संगठित लूट का ‘दवा मॉडल’

सूर्या हॉस्पिटल पर लग रहे आरोपों की परतें खोलें तो सबसे पहला नाम आता है— आर्थिक शोषण। सूत्रों और वायरल दावों के अनुसार, यहाँ के पर्चों पर दवाओं का खेल कुछ इस तरह रचा जाता है कि गरीब मरीज समझ ही नहीं पाता कि उसकी जेब कब कट गई।

  • जेनेरिक बनाम पेटेंट: मामूली कीमतों पर मिलने वाली जेनेरिक दवाओं को ‘पेटेंट’ के दामों पर बेचकर मरीजों से भारी मुनाफा वसूला जा रहा है।
  • अनावश्यक टेस्ट का जाल: इलाज शुरू होने से पहले टेस्ट्स की एक लंबी फेहरिस्त थमा दी जाती है, जिसका एकमात्र उद्देश्य कमीशन खोरी और अस्पताल का गल्ला भरना होता है।

2. चिकित्सा के नाम पर ‘अंग-भंग’ का खेल

 सबसे भयावह पहलू है ‘सर्जरी में लापरवाही’। आरोप है कि यहाँ के सर्जन इंसानी शरीर को प्रयोगशाला समझ बैठे हैं।

  • अधूरे और गलत ऑपरेशन: कई मामलों में देखा गया है कि हड्डी जोड़ने के नाम पर मरीज के पैर को ही छोटा कर दिया गया। जो मरीज अपने पैरों पर चलकर आया था, उसे ताउम्र के लिए बैसाखी पकड़ा दी गई।
  • सर्जिकल ब्लंडर्स: ऑपरेशन के दौरान पेट या शरीर के अंगों में सर्जिकल उपकरण (कैंची, रूई) छोड़ देना यहाँ की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है। क्या ये डॉक्टर हैं या अनाड़ी?

3. ‘मछली बाजार’ से भी बदतर हालात

अस्पताल के भीतर का माहौल संवेदनशीलता से कोसों दूर है। तीमारदारों का आरोप है कि यहाँ मरीजों को ‘सोने का अंडा देने वाली मुर्गी’ समझा जाता है।

“जब तक तीमारदार के गहने और जमीन न बिक जाए, तब तक अस्पताल का बिल रुकता नहीं और न ही मरीज को छुट्टी मिलती है।”

यह वाक्य उस खौफनाक हकीकत को दर्शाता है जहाँ इंसानियत का कत्ल हो चुका है और केवल पैसा ही भगवान बन बैठा है।

4. विरासत में मिली लापरवाही?

स्थानीय चर्चाओं और रिपोर्ट की मानें तो यह लापरवाही नई नहीं है। पहले पिता पर लापरवाही के संगीन आरोप लगते थे और अब वही ‘विरासत’ उनका पुत्र आगे बढ़ा रहा है। जिला अस्पताल के ठीक बगल में स्थित होने के कारण, दूर-दराज के भोले-भाले ग्रामीण अनजाने में यहाँ खिंचे चले आते हैं और फिर शुरू होता है उनके शोषण का अंतहीन सिलसिला।

5. प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल

उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) में इस अस्पताल के खिलाफ मुकदमों का अंबार लगा है। भारी-भरकम जुर्माने भी ठोंके जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल का धड़ल्ले से चलना प्रशासन की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

  • क्या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की आँखों पर पट्टी बंधी है?
  • क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही सीएमओ (CMO) ऑफिस की फाइलें खुलेंगी?

उपभोक्ता फोरम में मुकदमों का अंबार

संभवतः प्रदेश का यह ऐसा इकलौता अस्पताल होगा, जिसके नाम सबसे ज्यादा मुकदमे और जुर्माने दर्ज हैं। सस्ती फीस का झांसा देकर गरीब मरीजों को फंसाया जाता है और बाद में “इलाज” के नाम पर उन्हें बैसाखी थमा दी जाती है। पिता के बाद अब पुत्र पर भी लापरवाही और शोषण के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

हमारा सवाल: क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? जिला अस्पताल के पास स्थित होने का फायदा उठाकर मासूमों की जिंदगी से खेलने वाले इन “सफेदपोश लुटेरों” पर ताला कब लगेगा?

सावधान रहें! यह लेख उन तमाम लोगों के लिए एक चेतावनी है जो “सस्ते इलाज” के चक्कर में अपनी और अपने अपनों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।सूर्या हॉस्पिटल के खिलाफ उठा यह जन-आक्रोश एक चेतावनी है। बस्ती की जनता अब खामोश बैठने वाली नहीं है। अगर अब भी इस “कसाईखाने” जैसे अस्पताल पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो स्वास्थ्य व्यवस्था से आम आदमी का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।

सावधान रहें, सतर्क रहें और अपनों को इस ‘मौत के जाल’ से बचाएं!

Back to top button
error: Content is protected !!